संदेश

मौत

बेच दूं क्या सारी परेशानियां ,मौत अच्छा दाम दे रही है

कल की बारिश

काल रात मैंने सारे गम आसमान को सुना दिए आज मैं तो चुप हूँ, मगर आसमान बरस रहा है

चांद का टुकड़ा-1

मुझे चाँद देखना पसंद है  उसे चाँद सा दिखना पसंद है  वो भी अपने दाग़ नहीं छुपाती  माथे पे बिंदी नहीं लगाती  होंठों को उनके ही हाल पे छोड़ देती  मुस्कुराते ही समाज के सारे बंधन तोड़ देती  उसे कौन सिखाए सजना सँवरना  मैं खुश हूँ  मैं खुश हू कि वो आईने से अपना हाल नहीं पूछती  ये वो है नहीं ये बे फ़िज़ूल सवाल नहीं पूछती  सोंचो अगर वो काजल लगा ले  इत्तफा अनसुलझे बाल सुलझा ले  ये जमाना अपना रुख़ न बदल ले  हर कोई उसके साथ न चल दे  ये हवाएँ रुक न जाएँ देखने को कहीं  मैंने जब से देखा है मैं हूँ वहीं  उसे देखा है जब से होश आने लगा है जमाने का सारा ख़ौफ़ जाने लगा है। उसे कोई तोहफ़ा देने को जी चाहता है  मगर उसके लायक़ कुछ कहाँ आता है 

कल्पित इच्छाएं

  मेरे घर में आई थी तुम,  अपने सौ अरमान लिए। सतरंगी सपनों को लेकर,  अपनी ही पहचान लिए ॥ कुछ को पूर्ण किया है मैंने,  कुछ को तुमने करवाया। नए दौर की लड़की हो तुम,  माँ- पापा को समझाया ॥ हाँ मैंने संकल्प किये थे,  तुमको खुशियाँ देने के। बरबस सारे मोल चुकाए,  सुख से नैया खेने के ॥ घर की ख़ामोशी कह जाती,  तुम पूरी संतुष्ट नहीं। माँ छिपकर रो लेती लेकिन,  हुई कभी भी रुष्ट नहीं ॥ हाँ मेरा ही चयन रही तुम,  कहाँ तुम्हारा दोष रहा?  मेरे अनुचित समझौते थे,  अतः न तुम पर रोष रहा ॥ जाने क्या-क्या खो आए हैं, और शेष क्या-क्या इच्छाएँ| तनिक सोचना बिखरावों में, आखिर क्या सुख पाया है? आज़ादी की चाहत में ही, संस्कार का कोष लुटा। क्या आनन्द अकेलेपन में?  जीवन है बस घुटा-घुटा ॥ बच्चों के मन में तो ऐसा, बीज नहीं बोना  और शेष क्या-क्या इच्छाएँ, सारी कह दो ना